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MAN, MUSTACHE & HIS MISSION

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MAN, MUSTACHE & HIS MISSION

It is a potent combination of sorts. The reassuring rays of the soft winter sun warming you as you patiently wait in a sea of humanity, as it were, along the grand Rajpath in New Delhi, and to your pleasant surprise marigold and rose petals shower down as three IAF helicopters hover above in a ‘V’ formation. Even as you pull your sweater tight over your chest, you knowthe goose bumps are not the result of the January chill.

It is indeed difficult to escape this bewitching moment.

For those of us who have spent our childhood days in front of Doordarshan on Republic Day, it was no less mesmerizing as Ustad Bismillah Khan’s shehnai would appear to slowly lift the fog off India Gate from where the brave came marching past on the Rajpath.

On one such cold morning in 2006, an extraordinary old man bundled up in a thick shawl and woolen cap sat upright on his wheel chair listening to the live commentary of the Republic Day parade on All India Radio. As the heav…

Our 5th efforts - on card - for Vijendra Singh, grandson f Pandit Ram Prasad Bismil

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Forgotten Heroes and Martyrs of India's Freedom Movement 1857-1947, comprising pictorial details of as many as 201 revolutionaries and martyrs who were either hanged, shot dead to died within the four-wall during the freedom movement is expected to change the life of Bijendra Singh, grandson of Pandit Ram Prasad Bismil, who was hanged in Kakori train robbery case.

मेरे जीवन का पहला सम्मान

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उधम सिंह के पौत्र श्री जीत सिंह को एक लाख रूपये की फिर सहायता

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स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के भूले-बिसरे वंशजों पर फीचर फिल्म

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http://www.mediadarbar.com/shivenath/

1857 में हुए भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक तात्यां टोपे और जलियांवाला बाग कांड का बदला लेने वाले शहीद-ए-आज़म उधम सिंह का नाम तो आज भी देश भर में बच्चे-बच्चे की जुबान पर है, लेकिन आजादी के लिए अपने तन-मन-धन का बलिदान कर देने वाले इन शहीदों के वंशज़ आज किस बदहाली में अपना जीवन गुजार रहे हैं, यह किसी ने सोचा तक नहीं है। करीब एक सदी तक चले स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे अनेकों क्रान्तिकारी थे जिनके परिवारवालों और वंशजों को किसी ने याद नहीं रखा। इन भूले-बिसरे परिजनों और वंशजों की बदहाली को मशहूर पत्रकार शिवनाथ झा एक फीचर फिल्म के माध्यम से बयां करने की तैयारी में हैं। झा के मुताबिक “डिस्ग्रेसफुल” (अपमानजनक) नाम की इस फिल्म के माध्यम से भारत को आजादी दिलाने वाले ऐसे शहीदों, महापुरुषों और क्रान्तिकारियों के 22 वंशजों से बातचीत के आधार पर उन परिवारों की मौजूदा दुर्दशा को झलकाने का प्रयास किया जाएगा जिनके पुरखो ने 1857 से 1947 तक चले स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। शिवनाथ झा ने मीडिया दरबार को बताया कि उन्होंने इस फिल्म की योजना …

आजादी के नायकों के वंशजों की दुर्दशा बयां करेगी फिल्म

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नई दिल्ली, ५ मई (भाषा) : देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक तात्या टोपे की चौथी पीढ़ी के वंशज हों या जल्लिंवाला बाघ कांड का बदला लेने वाले शहीद-इ-आज़म उधम सिंह के पौत्र हों, स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे अनेक क्रन्तिकरिओन के परिजनों और वंशजों के हाल को एक लागु फिल्म के माध्यम से बयां किया जायेगा.

फ़िल्मकार के अनुसार भारत की आजादी दिलाने वाले ऐसे शहीदों, महापुरुषों और क्रन्तिकरिओन के ३० वंशजों से बातचित के आधार पर उन परिपरों की मौजूदा दुर्दशा को झलकने का प्रयास किया  जायेगा, जिनकी पुरानी पीढ़ियों ने १८५७ से लेकर १९४७ तक के काल में देश को गुलामी के चंगुइल से मुक्ति कराने के लिए जान लड़ा दी थी लेकिन आज उन्हें भुला दिया गया है.

फिल्म को मूर्त रूप देने में लगे पत्रकार शिवनाथ झा ने इस से पहले अपनी पत्नी नीना झा के साथ मिलकर "आन्दोलन:एक पुस्तक से" नामक अभियान भी शुरू किया है. यह फिल्म भी उसका ही एक हिस्सा है. फिल्म को इस साल अगस्त में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रदर्शित करने की योजना है.

झा ने बताया की डेढ़ घंटे की यह लहू फिल्म उन ३० परिवारों के सदस्यों से बातचीत पर आधारित होगी जो स्…

आन्दोलन:एक पुस्तक से

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