आजादी के नायकों के वंशजों की दुर्दशा बयां करेगी फिल्म

 नई दिल्ली, ५ मई (भाषा) : देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक तात्या टोपे की चौथी पीढ़ी के वंशज हों या जल्लिंवाला बाघ कांड का बदला लेने वाले शहीद-इ-आज़म उधम सिंह के पौत्र हों, स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे अनेक क्रन्तिकरिओन के परिजनों और वंशजों के हाल को एक लागु फिल्म के माध्यम से बयां किया जायेगा.

फ़िल्मकार के अनुसार भारत की आजादी दिलाने वाले ऐसे शहीदों, महापुरुषों और क्रन्तिकरिओन के ३० वंशजों से बातचित के आधार पर उन परिपरों की मौजूदा दुर्दशा को झलकने का प्रयास किया  जायेगा, जिनकी पुरानी पीढ़ियों ने १८५७ से लेकर १९४७ तक के काल में देश को गुलामी के चंगुइल से मुक्ति कराने के लिए जान लड़ा दी थी लेकिन आज उन्हें भुला दिया गया है.

फिल्म को मूर्त रूप देने में लगे पत्रकार शिवनाथ झा ने इस से पहले अपनी पत्नी नीना झा के साथ मिलकर "आन्दोलन:एक पुस्तक से" नामक अभियान भी शुरू किया है. यह फिल्म भी उसका ही एक हिस्सा है. फिल्म को इस साल अगस्त में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रदर्शित करने की योजना है.

झा ने बताया की डेढ़ घंटे की यह लहू फिल्म उन ३० परिवारों के सदस्यों से बातचीत पर आधारित होगी जो स्वतंत्रता सेनानियों के मौजूदा पीढ़ियों का प्रतिनिधित्वा कर रहे हैं और कहीं ना कही गुमनामी में और बड़े हाल में रह रहे हैं.

उन्होंने कहा की दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन ने एक बार कहा था की भुला दिए गए रस्त्रनायकों के परिवारों को "रास्ट्रीय परिवार" का दर्जा दिया जाना चाहिए . फिल्म में इस भावना को आगे रखने का प्रयास किया गया है.

झा दम्पति ने देश में संगीतकारों और कलाकारों के लिए तथा बुरे हाल में रह रहे शहीदों के वंशजों के पुनर्वास के मकसद से अपना आन्दोलन शुरू किया था जिसमे प्रयेक वर्ष एक किताब के माध्यम से ऐसे लोगों को पुनार्वषित करने का संकल्प है.

दोनों ने हाल ही में एक पुस्तक फोर्गोतें इंडियन हीरोज एंड मार्टियर्स : तहर नेग्लेक्टेड दिसेंदंत - १८५७-१९४७ का बिमोचन किया और इस मौके पर शहीद-इ-आज़म उधम सिंह के पौत्र जीत सिंह को ११.५ लाख रुपये की सहायता भी लोकमत समाचार पत्र समूह के मालिक विजय जे दरदा के हाथों प्रदान किया.

५७ साल के जीत सिंह का जिक्र करते हुए झा ने कहा को जल्लिंवाला बाघ कांड के दोषी अंग्रेज अधिकारी जनरल डायेर से बदला लेने वाले शहीद उधम सिंह को भुला दिया गया है और कितनी बड़ी बिडम्बना है की उनका पौत्र मजदूरी कर परिवार चलता था.

झा ने स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे की चौथी पीढ़ी के वन्सः विनायक राव टोपे को २००७ में पाता लगाया था जो उनके मुताबिक कानपूर के पास बिठुर में ख़राब परिस्थिति में रह रहे थे. झा ने विनायक राव के पुनर्वास की दिशा में काम किया और ५ लाख रूपये की आर्थिक मदद के अलावे उनकी दो बेटियों को भारतीय रेल में नौकरी दिलाने में भी सफल रहे . इसके अतिरिक्त झा दम्न्पति ने भारत के अंतिम मुग़ल बादशाह और १८५७ के कमांडर इन  चीफ  बहादुर  शाह  ज़फ़र  के पौत्र बधू  सुल्ताना  बेगम  के पुनर्वास  के लिए भी काम किया.

उन्होंने कहा की सभी  वंशजों को एक साथ लाने  का प्रयास किया जायेगा

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